अभिजीत की कलम

August 18, 2008

आज रक्षा बन्धन, काश के तुम घर पर होती!

Filed under: त्योहार, प्यार, रिश्ते — abhijitc @ 1:04 pm

आज अगर तुम घर पर होती,
तो घर को सर पर चढ़ा ली होती,
भाई कि टांग खींच रही होती,
काश के तुम आज घर पर होती।

आज अगर तुम घर पर होती,
पापा के इर्द गिर्द उछल रही होती,
मम्मी से लाड प्यार कर रही होती,
काश के तुम आज घर पर होती।

आज अगर तुम घर पर होती,
अपने भैया से फरमाइश मनवा रही होती,
और भैया पर प्यार का हक़ जता रही होती,
काश के तुम आज घर पर होती।

आज अगर तुम घर पर होती,
अच्छे अच्छे पकवान बना रही होती,
खिल-खिलाहट से घर को महका रही होती,
काश के तुम आज घर पर होती।

आज अगर तुम घर पर होती,
तुम यह कर रही होती, तुम वह कर रही होती,
लेकिन अगर तुम आज घर पर होती,
तुम्हारी याद इतनी ना आ रही होती॥

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