अभिजीत की कलम

May 9, 2007

ज़िन्दगी चलती रहती है।

Filed under: गम, शायरी — abhijitc @ 4:26 pm

जब ग़म न था।
तो शायरी न थी॥
जबसे ग़म ज़िन्दगी में आया।
शायरी भी साथ में लहराने लगी॥

सुबह आई कई नयी।
मगर हम रहे वहीँ के वहीँ॥
ना बदले थे, ना बदले हैं, ना बदलेंगे।
पर ज़माने बदलते ही रहेंगे॥

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