जब ग़म न था।
तो शायरी न थी॥
जबसे ग़म ज़िन्दगी में आया।
शायरी भी साथ में लहराने लगी॥
सुबह आई कई नयी।
मगर हम रहे वहीँ के वहीँ॥
ना बदले थे, ना बदले हैं, ना बदलेंगे।
पर ज़माने बदलते ही रहेंगे॥
जब ग़म न था।
तो शायरी न थी॥
जबसे ग़म ज़िन्दगी में आया।
शायरी भी साथ में लहराने लगी॥
सुबह आई कई नयी।
मगर हम रहे वहीँ के वहीँ॥
ना बदले थे, ना बदले हैं, ना बदलेंगे।
पर ज़माने बदलते ही रहेंगे॥