जाने कब से तड़प रहा था ।
एक प्यारी-सी बहना के लिए ॥
बचपन से मुझे थी यह आस ।
की होगी एक लाडली बहना, मेरे भी पास ॥
इंतज़ार की लडीयाँ नापते हुए, कट रही थी यह ज़िन्दगी ।
आशा कि एक किरण थी, लेकिन वह भी अब बुझ रही थी ॥
अचानक आई तुम मेरी ज़िन्दगी में ।
तो जैसे बहार आई मेरी ज़िन्दगी में ॥
इतने दिनों कि थी जो मेरी जलन ।
आज होगी दूसरे की जलन ॥
अब तक जो लोग मुझे रिझाते थे ।
अब आई है बारी उनके रिझने कि ॥
बस अब तो है सिर्फ इतनी-सी दुआ ।
भाई – बहन कि यह प्यारी जोडी रहे सलामत हंमेशा ॥