अभिजीत की कलम

February 4, 2007

मेरी प्यारी बहना

Filed under: रिश्ते, शायरी — abhijitc @ 11:40 am

जाने कब से तड़प रहा था ।
एक प्यारी-सी बहना के लिए ॥

बचपन से मुझे थी यह आस ।
की होगी एक लाडली बहना, मेरे भी पास ॥

इंतज़ार की लडीयाँ नापते हुए, कट रही थी यह ज़िन्दगी ।
आशा कि एक किरण थी, लेकिन वह भी अब बुझ रही थी ॥

अचानक आई तुम मेरी ज़िन्दगी में ।
तो जैसे बहार आई मेरी ज़िन्दगी में ॥

इतने दिनों कि थी जो मेरी जलन ।
आज होगी दूसरे की जलन ॥

अब तक जो लोग मुझे रिझाते थे ।
अब आई है बारी उनके रिझने कि ॥

बस अब तो है सिर्फ इतनी-सी दुआ ।
भाई – बहन कि यह प्यारी जोडी रहे सलामत हंमेशा ॥

Blog at WordPress.com.