अभिजीत की कलम

January 9, 2007

रिश्ते – बदनामी – समाज

Filed under: गम, शायरी — abhijitc @ 10:11 pm

रिश्ते होते हैं कई अनेक।
भाई – बहन, माँ – बाप, बीवी – बच्चे, रुप अनेक॥

रिश्ते बनाओ समाज के अनुमति से।
वर्ना गुज़ारो ज़िन्दगी बदनामी में॥

इन रिश्तों को न करो बदनाम।
जमाने से है यही विनती हरदम॥

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