रिश्ते होते हैं कई अनेक।
भाई – बहन, माँ – बाप, बीवी – बच्चे, रुप अनेक॥
रिश्ते बनाओ समाज के अनुमति से।
वर्ना गुज़ारो ज़िन्दगी बदनामी में॥
इन रिश्तों को न करो बदनाम।
जमाने से है यही विनती हरदम॥
रिश्ते होते हैं कई अनेक।
भाई – बहन, माँ – बाप, बीवी – बच्चे, रुप अनेक॥
रिश्ते बनाओ समाज के अनुमति से।
वर्ना गुज़ारो ज़िन्दगी बदनामी में॥
इन रिश्तों को न करो बदनाम।
जमाने से है यही विनती हरदम॥