अभिजीत की कलम

December 19, 2006

शक और प्यार

Filed under: गम, शायरी — abhijitc @ 7:34 pm

शक वह बिमारी है।
जिसका कोई इलाज नहीं॥

प्यार वह भावना है।
जिसका कोई मोल नहीं॥

जो प्यार पर शक करता है।
उसे समझाए येसा किसी में दम नही॥

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