अभिजीत की कलम

December 12, 2006

ज़िन्दगी में साथ

Filed under: गम, शायरी — abhijitc @ 4:07 pm

ज़िन्दगी की राह में चले हम,
बाधाओं से जुझते हुए।

साथ अपनों का छुटता गया,
आखिर में रह गये हम अकेले।

7 Comments »

  1. बहुत खूब… हिन्दी चिट्ठों की दुनिया में आपका हार्दिक स्वागत् है। उम्मीद है कि आप इसी तरह लगातार लेखन करते रहेंगे।

    Comment by Pratik Pandey — December 12, 2006 @ 4:46 pm | Reply

  2. हिन्दी चिट्ठों की दुनिया में आपका हार्दिक स्वागत् है। लिखतें रहें।

    Comment by गिरिराज जोशी — December 12, 2006 @ 5:18 pm | Reply

  3. वाह उस्ताद वाह,
    आपका स्वागत है।
    लिखते रेहना,
    मेरी तरह ब्रेक मत लगाना।

    Comment by khushikibaat — December 12, 2006 @ 5:30 pm | Reply

  4. अकेले कहाँ हो साथ तुम्हारे सभी चिट्ठाकार हैं।
    लिखे जाओ भईया टिप्पणी के लिए हम तैयार हैं। ;)

    Comment by Shrish — December 27, 2006 @ 7:26 am | Reply

  5. हर कामियाबी पे आपका नाम होगा,
    आपके हर कदम पे दुनिया का सलाम होगा ।
    मुश्किलों का सामना हिम्मत से करना,
    दुआ है एक दिन वक्त भी आपका गुलाम होगा ॥

    All the best Tatun Dada.

    - Prosun

    Comment by prosun — January 13, 2007 @ 8:58 pm | Reply

  6. अकेले आए थे,
    अकेले हि जब जाना है ।
    तो क्यों घम करना कि,
    कोइ साथ है या नाही ॥

    - अनामिका

    Comment by anamika — January 15, 2007 @ 8:52 pm | Reply

  7. That was an awesome one! And very true…
    Keep writing mate.

    Comment by Mihir — March 29, 2009 @ 6:04 pm | Reply


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