ज़िन्दगी की राह में चले हम, बाधाओं से जुझते हुए।
साथ अपनों का छुटता गया, आखिर में रह गये हम अकेले।
बहुत खूब… हिन्दी चिट्ठों की दुनिया में आपका हार्दिक स्वागत् है। उम्मीद है कि आप इसी तरह लगातार लेखन करते रहेंगे।
Comment by Pratik Pandey — December 12, 2006 @ 4:46 pm | Reply
हिन्दी चिट्ठों की दुनिया में आपका हार्दिक स्वागत् है। लिखतें रहें।
Comment by गिरिराज जोशी — December 12, 2006 @ 5:18 pm | Reply
वाह उस्ताद वाह, आपका स्वागत है। लिखते रेहना, मेरी तरह ब्रेक मत लगाना।
Comment by khushikibaat — December 12, 2006 @ 5:30 pm | Reply
अकेले कहाँ हो साथ तुम्हारे सभी चिट्ठाकार हैं। लिखे जाओ भईया टिप्पणी के लिए हम तैयार हैं।
Comment by Shrish — December 27, 2006 @ 7:26 am | Reply
हर कामियाबी पे आपका नाम होगा, आपके हर कदम पे दुनिया का सलाम होगा । मुश्किलों का सामना हिम्मत से करना, दुआ है एक दिन वक्त भी आपका गुलाम होगा ॥
All the best Tatun Dada.
- Prosun
Comment by prosun — January 13, 2007 @ 8:58 pm | Reply
अकेले आए थे, अकेले हि जब जाना है । तो क्यों घम करना कि, कोइ साथ है या नाही ॥
- अनामिका
Comment by anamika — January 15, 2007 @ 8:52 pm | Reply
That was an awesome one! And very true… Keep writing mate.
Comment by Mihir — March 29, 2009 @ 6:04 pm | Reply
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बहुत खूब… हिन्दी चिट्ठों की दुनिया में आपका हार्दिक स्वागत् है। उम्मीद है कि आप इसी तरह लगातार लेखन करते रहेंगे।
Comment by Pratik Pandey — December 12, 2006 @ 4:46 pm |
हिन्दी चिट्ठों की दुनिया में आपका हार्दिक स्वागत् है। लिखतें रहें।
Comment by गिरिराज जोशी — December 12, 2006 @ 5:18 pm |
वाह उस्ताद वाह,
आपका स्वागत है।
लिखते रेहना,
मेरी तरह ब्रेक मत लगाना।
Comment by khushikibaat — December 12, 2006 @ 5:30 pm |
अकेले कहाँ हो साथ तुम्हारे सभी चिट्ठाकार हैं।
लिखे जाओ भईया टिप्पणी के लिए हम तैयार हैं।
Comment by Shrish — December 27, 2006 @ 7:26 am |
हर कामियाबी पे आपका नाम होगा,
आपके हर कदम पे दुनिया का सलाम होगा ।
मुश्किलों का सामना हिम्मत से करना,
दुआ है एक दिन वक्त भी आपका गुलाम होगा ॥
All the best Tatun Dada.
- Prosun
Comment by prosun — January 13, 2007 @ 8:58 pm |
अकेले आए थे,
अकेले हि जब जाना है ।
तो क्यों घम करना कि,
कोइ साथ है या नाही ॥
- अनामिका
Comment by anamika — January 15, 2007 @ 8:52 pm |
That was an awesome one! And very true…
Keep writing mate.
Comment by Mihir — March 29, 2009 @ 6:04 pm |