अभिजीत की कलम

December 19, 2006

शक और प्यार

Filed under: गम, शायरी — abhijitc @ 7:34 pm

शक वह बिमारी है।
जिसका कोई इलाज नहीं॥

प्यार वह भावना है।
जिसका कोई मोल नहीं॥

जो प्यार पर शक करता है।
उसे समझाए येसा किसी में दम नही॥

December 12, 2006

ज़िन्दगी में साथ

Filed under: गम, शायरी — abhijitc @ 4:07 pm

ज़िन्दगी की राह में चले हम,
बाधाओं से जुझते हुए।

साथ अपनों का छुटता गया,
आखिर में रह गये हम अकेले।

ग़म और ज़िन्दगी

Filed under: गम, शायरी — abhijitc @ 3:32 pm

ग़म की शायरी करते रहे।

ज़िन्दगी का मज़ाक उडाते रहे।

पता न था कि एक दिन ऐसा भी आयेगा।

ग़म होगा बसेरा मेरा।

और ज़िन्दगी मेरा मज़ाक उडाता जायेगा।

Blog at WordPress.com.