शक वह बिमारी है।
जिसका कोई इलाज नहीं॥
प्यार वह भावना है।
जिसका कोई मोल नहीं॥
जो प्यार पर शक करता है।
उसे समझाए येसा किसी में दम नही॥
शक वह बिमारी है।
जिसका कोई इलाज नहीं॥
प्यार वह भावना है।
जिसका कोई मोल नहीं॥
जो प्यार पर शक करता है।
उसे समझाए येसा किसी में दम नही॥
ज़िन्दगी की राह में चले हम,
बाधाओं से जुझते हुए।
साथ अपनों का छुटता गया,
आखिर में रह गये हम अकेले।
ग़म की शायरी करते रहे।
ज़िन्दगी का मज़ाक उडाते रहे।
पता न था कि एक दिन ऐसा भी आयेगा।
ग़म होगा बसेरा मेरा।
और ज़िन्दगी मेरा मज़ाक उडाता जायेगा।