उनका नज़र आना, न आना
बैठे थे उनके राह में,
इंतेज़ार कि लडीयाँ नापते हुए।
शाम डलने लागी, जाम पर जाम भरने लगें,
पर फीर भी वह नज़र न आई॥
नज़रें थक गई, आँखें भर आई।
पर फीर भी वह नज़र न आई॥
ताकते ताकते थक गए,
पर वह नज़र न आए।
अचानक वह नज़र जो आए तो,
पैमाने छलक गए जैसे, दिल के अरमान भडक गए ऐसे।
तीर दिल के आर पार भी हो,
पर निशान नज़र न आए॥
वह नज़र न आए तो दिल ऊब जाता है।
जो वह नज़र आए तो दिल डूब जाता है॥
हाय! इस दिल का क्या करूं?
न रोक सकूँ,
न टोक सकूँ,
हाए मैं करूँ तो क्या करूँ?